सादर,
मुकुल बंसल
अध्यक्ष
श्रीमुक्तिनाथ वेद विद्याश्रम (संस्कृत गुरुकुल) श्री माता मनसा देवी परिसर, पंचकूला, हरियाणा
गुरुदेव श्री मुक्तिनाथ जी महाराज ने वेद शिक्षा के पुनर्जीवन का संकल्प लिया। पंचकूला की पुण्यभूमि को इस मिशन के लिए चुना गया।
गुरुदेव श्री मुक्तिनाथ जी महाराज ने वेद शिक्षा के पुनर्जीवन का संकल्प लिया। पंचकूला की पुण्यभूमि को इस मिशन के लिए चुना गया।
आश्रम की विधिवत स्थापना यज्ञोपवित संस्कार एवं वेदपाठ के साथ की गई। कुछ ही छात्रों से शिक्षण प्रारंभ हुआ।
पहले दीक्षित शिष्यों का उत्सवपूर्ण समापन, जिनमें से कई आज स्वयं शिक्षण कार्य में संलग्न हैं।
आवासीय भवन, यज्ञशाला, भोजनालय एवं कक्षाओं का निर्माण पूरा हुआ। गुरुकुल पूर्णतः आवासीय बना।
देशभर के आचार्यों, वेदज्ञों और संस्कृत प्रेमियों का समागम — वैदिक ज्ञान और संस्कृति पर संवाद।
आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों के लिए संपूर्ण निःशुल्क शिक्षा एवं आवास की व्यवस्था।
ऑनलाइन वेद व संस्कृत कक्षाओं का प्रारंभ, जिससे देश-विदेश के विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।
संस्था की 20वीं वर्षगाँठ समारोह — नए भवनों का शिलान्यास, पुस्तक विमोचन और अखिल भारतीय वैदिक सम्मेलन का आयोजन।
सादर,
मुकुल बंसल
अध्यक्ष
श्रीमुक्तिनाथ वेद विद्याश्रम (संस्कृत गुरुकुल) श्री माता मनसा देवी परिसर, पंचकूला, हरियाणा
सादर,
दिनेश सिंगला
संरक्षक
श्रीमुक्तिनाथ वेद विद्याश्रम (संस्कृत गुरुकुल)
श्री माता मनसादेवी परिसर, पंचकूला, हरियाणा
भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत भाषा को समर्पित संस्कृत संवर्द्धन में कटिबद्ध भारत को पुनः विश्वगुरु के स्थान पर सुशोभित करने के उद्देश्य से गुरुकुल के संस्थापक आचार्य स्वामी प्रसाद मिश्र (स्वामी श्रीनिवासाचार्य) ने अपने परमाराध्य वैकुण्ठवासी गुरुदेव अनन्त श्रीविभूषित श्री श्री 1008 स्वामी श्रीगोविन्दाचार्य जी के मार्गदर्शन में अपने जीवन को भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत के संरक्षण हेतु अर्पण करते हुए पूज्य गुरुदेव जी के आदेशानुसार 2001 में औद्योगिक क्षेत्र 67 (गीता प्रेस मन्दिर) फेस 1, चण्डीगढ़ में प्रथम गुरुकुल की स्थापना 07 विद्यार्थियों के साथ की। लगभग 2 वर्ष पश्चात् विद्यार्थियों की संख्या अधिक होते देख नए परिसर का अन्वेषण करते हुए मोरिंडा में 2004 में गुरुकुल की प्रथम शाखा का प्रारम्भ किया। इसके बाद महादेव मन्दिर (सकेतड़ी, पंचकूला) में 2 वर्ष तक चलाया गया, लेकिन उचित व्यवस्था नहीं प्राप्त हो सकी, क्योंकि गुरुकुल अपने शैशवावस्था में धनाभाव के कारण स्वयं विद्यार्थियों को उचित व्यवस्था देने में असमर्थ था और समाज पर ही आश्रित था। इसी बीच में आचार्य जी द्वारा 2004 से लेकर 2014 तक जयपुर (राजस्थान), अर्की जिला सोलन (हिमाचल प्रदेश) महाकाली मन्दिर सेक्टर-30 (चण्डीगढ़) बाबा बालकनाथ मन्दिर, ट्रिब्यून चौक (चण्डीगढ़) प्लाट नं. 81 औद्योगिक क्षेत्र फेस – 1 (पंचकूला ) प्राचीन शिव मन्दिर, मौली जागरा (चण्डीगढ़ ) ग्रीनसिटी (जीरकपुर ) लक्ष्मी भवन धर्मशाला (पंचकूला) आदि अनेक स्थानों पर गुरुकुल अस्थाई रूप में चलता रहा, लेकिन कहीं पर भी स्थाई व्यवस्था नहीं प्राप्त कर सका।
संस्कृत के संरक्षण में कटिबद्ध आचार्य जी विपरीत परिस्थितियों में भी गुरुकुल के लक्ष्य को पाने के लिए अथक परिश्रम करते रहे, संस्कृत गुरुकुल के विद्यार्थियों का परचम न केवल गुरुकुल अपितु संस्कृत महाविद्यालयों विश्वविद्यालयों में प्रतिस्पर्धा के माध्यम से लहराता रहा तथा संस्कृत परम्परा के जगत् में अपने स्वरूप को स्थापित करने का प्रयास करता रहा । गुरुकुल के सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्य को समाज में बहुत सम्मान प्राप्त हुआ और गुरुकुल का अपना भूमि-भवन हो इसके लिए आचार्य जी का प्रयास अनवरत चलता रहा । गुरुकुल के सहयोगी श्री ईश्वर जिन्दल जी ने आचार्य स्वामी प्रसाद मिश्र जी को आश्वासन दिया कि इस नेक कार्य हेतु मैं सरकार से भूमि हेतु याचना करूँगा, जिससे सनातन संस्कृति के प्रचार में आ रही बाधा दूर की जा सके। इसी क्रम में गुरुकुल के सदस्यों द्वारा 2013 में भगवान् श्रीराम कथा का तथा 2016 में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के मुखारविंद से करवाया गया। इस कार्यक्रम में श्रीमान् ईश्वर जिंदल जी के प्रयासों से हरियाणा के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय श्री मनोहर लाल खट्टर जी का कथा में आगमन हुआ।