गुरुकुल के आचार्यगण
"आचार्य देवो भव" अर्थात् आचार्य भगवान तुल्य हैं। श्रीमुक्तिनाथ वेदवेदांगाश्रम में विज्ञान, तपस्वी एवं अनुभवी आचार्यगण विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं, जो केवल विषयज्ञान ही नहीं, अपितु जीवनमूल्यों की भी शिक्षा देते हैं।
संस्थापकाचार्य – आचार्य स्वामी प्रसाद मिश्र (स्वामी श्रीनिवासाचार्य जी)
पद – संस्थापक एवं संचालक
विशेषज्ञता – व्याकरण, ज्योतिष, वेदांत, दर्शन तथा पुराणेतिहास
योग्यता – आचार्य (व्याकरण तथा वेदांत)
अनुभव एवं विशेषता –
- 35 वर्ष से अधिक का शिक्षण का अनुभव
संस्कृत व्याकरण, मीमांसा एवं वेदांत के सिद्धांतों को सरल और ग्राह्य रूप में प्रस्तुत करने की अद्वितीय क्षमता
ज्योतिष एवं वेदांत के व्याख्याता तथा भारतीय संस्कृति के दार्शनिक व्याख्यानकार के रूप में प्रतिष्ठित
विशेषता :
वैदिक परम्परा, वैष्णव परम्परा तथा भारतीय जीवनशैली के प्रचार हेतु देश–विदेश में व्याख्यानदाता
वैदिक परम्परा, वैष्णव परम्परा तथा भारतीय जीवनशैली के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में अग्रणी
देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों एवं संगोष्ठियों में व्याख्यान देकर भारतीय ज्ञानधारा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करना
गुरुकुल शिक्षा की प्राचीन पद्धति को आधुनिक परिवेश के साथ जोड़कर विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का संवर्धन
आचार्य सुनील कुमार पाण्डेय
विषय – ऋग्वेद/यजुर्वेद (माध्यन्धिन शाखा), छंदपाठ, शिक्षाशास्त्र, ज्योतिष
योग्यता – वेदविभूषण, आचार्य (कृतव्यूह, वेदभाष्य), बी.एड., एम.ए. (संस्कृत, हिन्दू अध्ययन)
अनुभव – 5 वर्ष से अधिक (वेद, यज्ञोपशिक्षण)
विशेषता – विद्यार्थियों को संस्कार देने हेतु नियमित तथा नैतिक प्रशिक्षण
उपलब्धि – राज्य स्तरीय वेदपाठ प्रतियोगिताओं में निर्णायक
आचार्य संजीव भारद्वाज
विषय – व्याकरण, साहित्य, योग
योग्यता – आचार्य (व्याकरण), बी.एड., एम.ए., संस्कृति, डिप्लोमा (कर्मकाण्ड)
अनुभव – 4 वर्ष से अधिक
विशेषता – छात्रों का योग व शारीरिक पक्ष दृढ़ बनाना
आचार्य रोकम गोस्वामी
विषय – व्याकरण, कर्मकाण्ड, संस्कृत भाषा प्रशिक्षण
योग्यता – आचार्य (व्याकरण), बी.एड., डिप्लोमा (कर्मकाण्ड)
अनुभव – 3 वर्ष से अधिक
विशेषता – कर्मकाण्ड तथा वैदिक प्रक्रिया
आचार्य हेमन्त कौशिक
विषय – भारतीय दर्शन (न्याय, वेदांत)
योग्यता – एम.ए. दर्शन, प्रमाणपत्र (प्राकृत, शारदा लिपि)
अनुभव – 2 वर्ष से अधिक
विशेषता – विद्यार्थियों में तार्किक चिन्तन व स्वाध्याय की प्रेरणा
उपलब्धियाँ –
अखिल भारतीय शास्त्रीय मंच में प्रतिनिधित्व
न्याय शास्त्र में प्रथम पुरस्कार
विश्वविद्यालय स्तर पर द्वितीय स्थान
स्वर्णपदक – अध्यवाची (बेंगलुरु) साहित्य (उज्जैन)
कांस्यपदक – अध्यवाची (भोपाल)
श्री अनिल शास्त्री
विषय – व्याकरण, साहित्य, संगणक, जनसंचार माध्यम (सोशल मीडिया)
योग्यता – शास्त्री, एम.ए. (संस्कृत, पत्रकारिता एवं जनसंचार), डिप्लोमा (कम्प्यूटर), पीएच.डी. (शोधछात्र)
अनुभव
संस्कृत समापन प्रशिक्षण में विद्यालय/महाविद्यालय/विश्वविद्यालयों में 5 वर्ष से अधिक अनुभव
स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध कार्यों में 5 वर्षों का अनुभव
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से सम्बन्धित कार्य
वेबसाइट व सोशल मीडिया प्रबंधन
शारदा, ब्राह्मी, प्राचीन लिपि पठन-लेखन, पाण्डुलिपि संरक्षण व संपादन
विशेषता
विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी एवं रचनात्मक शिक्षा
पी.टी.टी., एम.एस. एक्सेल, एम.एस. वर्ड में संस्कृत के अनुप्रयोग का प्रशिक्षण
प्रेज़ेन्टेशन, कोरल ड्रॉ व शैक्षिक कार्यों में उपयोगी प्रशिक्षण
उपलब्धियाँ
राज्यस्तरीय एवं राष्ट्रीय स्पर्धाओं में प्रतिभागिता व शोधपत्र प्रस्तुति
कई विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में प्रथम/द्वितीय पुरस्कार
श्रीमती ऋचा
विषय – हिन्दी, गणित, अंग्रेजी, संगणक
योग्यता – स्नातक (Computer Science), डिप्लोमा (कम्प्यूटर), बी.एड.
अनुभव – 2 वर्ष से अधिक
विशेषता – छात्रों को आधुनिक तकनीक तथा अंग्रेजी भाषा में दक्ष बनाना
आचार्य दिवाकर शर्मा
विषय – ज्योतिष, व्याकरण, साहित्य, दर्शन, संगणक
योग्यता –
आचार्य (सिद्धांतज्योतिष)
एम.ए. (संस्कृत, हिन्दू अध्ययन)
शिक्षा–शास्त्री (बी.एड.)
डिप्लोमा (वास्तु, आयुर्वेद, कर्मकाण्ड, PGDCA)
अन्य योग्यता –
हिमाचल T.E.T (TGT Sanskrit)
CTET: Primary & Elementary Level
अनुभव – 1 वर्ष से अधिक शिक्षण, अनेक शोधपत्र प्रकाशित, राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता
विशेषता –
छात्रों को रचनात्मक व नवनवोन्मेषी बनाना
समस्या समाधान क्षमता विकसित करना
उपलब्धियाँ
विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय स्तर की 34 में से 32 स्पर्धाओं में प्रथम पुरस्कार
अनेक संस्थानों और विश्वविद्यालयों की स्पर्धाओं में निर्णायक
केन्द्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय, त्रिवेन्द्रम – स्वर्णपदक
दहेरी – राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय – स्वर्णपदक
सम्पादकीय कार्य, संस्कृत पत्रकारिता में योगदान